पानी का पैसा पानी में हिन्दी स्टोरी :- मोहन नाम का एक गरीब ग्वाला था , उसके पास दो पैसे थी उनका दूध बेचकर वह अपने परिवार का निर्वाह चलाता था । उसकी आमदनी अधिक नहीं थी । पर वह उसे संतुष्ट था , समय बितता गया , गांव के धनी लोगों का ठाट – बाट देखकर मोहन को भी अमीर बनने का लालच हुआ।
ज्यादा धन कमाने के लिए वह दूध में पानी मिलाकर बेचने लगा धीरे-धीरे मोहन भी अमीर बन गया , उसने एक और भैंस खरीदने का विचार किया ।

एक दिन सवेरे मोहन भैंस खरीदने के लिए एक बड़े गांव की ओर चल पड़ा रुपयों से भरी थैली उसकी कमर में बंधी थी । रास्ते में एक नदी आई मोहन ने सोचा मैं इस नदी में स्नान कर लूं और कुछ जलपान करके फिर आगे बढ़ूँ ।
मोहन ने अपने कपड़े और रुपयों से भरी थैली किनारे पर रख दी । इसके बाद वह स्नान करने के लिए नदी के पानी में उतरा । अचानक एक बंदर वहां आ पहुंचा । और रुपयों की थैली उठाकर पेड़ पर चढ़ गया ।
वह थाली से रुपए निकाल निकालकर नीचे फेंकने लगा कुछ रुपए नदी के पानी में गिरे और कुछ जमीन पर पड़े मोहन यह देखकर हक्का-बक्का रह गया ।
मोहन पानी से बाहर आया और जमीन पर पड़े रुपए इकट्ठे करने लगा लेकिन ज्यादा रुपए तो नदी के पानी में ही गिरे थे । अब मोहन की समझ में आ गया कि दूध में पानी मिलाकर उसने जो रुपए कमाए थे।
वह सब पानी में चले गए उसे बहुत पछतावा हुआ । उसने कसम खाई कि अब वह कभी दूध में पानी नहीं मिलेगा ।
सिख : बेईमानी की कमाई कभी टिकती नहीं । आदमी को अपना व्यवसाय ईमानदारी से करना चाहिए।
एकता की शक्ति
एकता की शक्ति :- एक गांव में चतुर सिंह नामक एक धनी किसान रहता था । वह बूढ़ा हो गया था , उसके चार बेटे थे वह आपस में लड़ते झगड़ते रहते थे । बूढ़ा किसान उन्हें मिलकर रहने के लिए समझाता था पर पिता की सीख का उन पर कोई असर न होता था।

एक बार चतुर सिंह बीमार पड़ा दिन पर दिन उसकी बीमारी बढ़ती गई । अब उसे विश्वास हो गया की मृत्यु उसके बहुत निकट आ पहुंची है। उसे अपने बेटे की बहुत चिंता हो रही थी।
आखिर उसने चारों बेटों को अपने पास बुलाया फिर उसने लकड़ी का एक गट्ठर मंगवाया उसने बारी – बारी से हर बेटे को वह गट्ठर तोड़ने के लिए , कहा लड़कों ने गट्ठर तोड़ने की भरसक कोशिश की पर उनमें से कोई भी उसे गट्ठर को तोड़ नहीं सका।
इसके बाद किसान ने उस गट्ठर में से एक-एक लकड़ी एक-एक बेटे को तोड़ने के लिए दी । सब ने अपनी-अपनी लकड़ी आसानी से तोड़ डाली तब वह किसान ने उनसे कहा , ” अच्छा बताओ जब यह लकड़िया गट्ठर के रूप में बंधी हुई थी । तब तुम इन्हें क्यों नहीं तोड़ पाए ? ”
बेटों ने कहा , ” पिताजी , पर लड़कियां गट्ठर में एक साथ बनी हुई थी । वह संगठित थी इसलिए हमने तोड़ नहीं पाए ।
तब बूढ़े किसान ने उन्हें समझाया , ” प्यार बेटों गट्ठर कि लकड़ियों की तरह तुम लोग भी संगठित रहोगे तो कोई तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकेगा । किंतु यदि तुम लोग आपस में लड़ते झगड़ते रहोगे ।
तो अलग-अलग लकड़ियों की तरह तुम भी नष्ट हो जाओगे । बूढ़े पिता की यह बात को सुनकर चारों बेटों की आंखें खुल गई । उन्होंने मिलजुल कर रहने का निश्चय किया ।
सिख : एकता में बहुत शक्ति होती है।
एकता ही बल है
एकता ही बल है :- एक बहेलिया था । एक दिन बड़े सवेरे वह जाल लेकर शिकार करने के लिए चल पड़ा उसने एक खेत में जाल बिछा दिया। उसने जल के ऊपर अनाज के दाने बिखेर दिए । इसके बाद वह थोड़ी दूर एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया।

उसी समय कबूतरों का एक झुंड उड़ता हुआ वहां से गुजरा । कबूतरों ने खेत में अनाज के दाने ही दाने बिखरे हुए देखे लालच में आकर वह नीचे उतरे ।
जैसे ही उन्होंने दाने चुगना शुरू कर किया कि वह सभी जाल में फंस गए । सभी कबूतर पछताने लगे । लेकिन अब पछताने से क्या होने वाला था ?
सभी कबूतर जान बचाने की चिंता में पड़े हुए थे । तभी उनमें से एक बूढ़े कबूतर को एक तरकीब सूझी उसने सभी कबूतरों को जोर लगाकर एक साथ उड़ने का इशारा किया ।
सभी कबूतर जाल के साथ उड़े और आसमान में आगे बढ़ने लगे । उसे शिकार भी नहीं मिला और जल से भी हाथ धोना पड़ा।
सभी कबूतर जाल के साथ एक चूहे के बील के पास पहुंचे वह चूहा उस बूढ़े कबूतर का मित्र था । चूहे ने अपने पैने दांतों से जाल काट दिया । इस प्रकार सब कबूतरों की जान बच गई ।
सिख : एकता में बड़ी शक्ति है संकट में बुद्धि और एकता से काम लेना चाहिए ।
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