ईमानदारी का फल अथवा लकड़हारा और देवदूत : Woodcutter story

The Fruit of Honesty or The Woodcutter and the Angel : ईमानदारी का फल अथवा लकड़हारा और देवदूत :- दोस्तों आज के इस लेख में जानेंगे ईमानदारी का फल अथवा लकड़हारा और देवदूत कि कहानी जानने से पहले आपको इस लेख को अंत तक पढ़ना और अच्छे से समझना होगा तभी आप कुछ सिख पाएंगे । आइए जानते ईमानदारी का फल अथवा लकड़हारा और देवदूत के कहानी के बारे में कि क्या हैं ।

लकड़हारा और देवदूत कि कहानी ईमानदारी का फल अथवा लकड़हारा और देवदूत The Fruit of Honesty or The Woodcutter and the Angel
लकड़हारा और देवदूत कि कहानी ईमानदारी का फल अथवा लकड़हारा और देवदूत The Fruit of Honesty or The Woodcutter and the Angel

ईमानदारी का फल अथवा लकड़हारा और देवदूत : गोपाल एक गरीब लकड़हारा था वह रोज जंगल में जाकर लड़कियां काटता था । और शाम को उन्हें बाजार में बेच देता था । लड़कियों को बेचने से जो पैसे मिलते उन्हीं से उसके परिवार का गुर्जर बसर होता था ।

एक दिन गोपाल जंगल में बहुत दूर तक जा चुका था , वहां उसकी दृष्टि नदी के किनारे एक बड़े पेड़ पर पड़ी उसने सोचा कि आज उस पेड़ से बहुत सारी लकड़िया मिल जाएगी वह अपनी कुल्हाड़ी लेकर उस पेड़ पर चढ़ गया था ।

अभी उसने एक डाल काटना शुरू ही किया था कि अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूट गई और नदी में जाकर गिर गई गोपाल झटपट पेड़ से नीचे उतरा और नदी में अपनी कुल्हाड़ी ढूंढने लगा , उसने बहुत कोशिश की पर कुल्हाड़ी उसके हाथ नहीं लगी उदास होकर वह पेड़ के नीचे जाकर बैठ जाता हैं ।

इतने में एक देवदूत वहां आ पहुंचा उसने गोपाल से उसकी उदासी का कारण पूछा गोपाल ने कुल्हाड़ी नदी में गिर जाने की बात बताई थी। देवदूत ने उसे धीरज बताते हुए कहा घबराओ मत मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी निकाल दूंगा।

लकड़हारा और देवदूत कि कहानी (lakadhara aur sone ki kulahadi)

यह कहकर देवदूत ने नदी में डुबकी लगाकर वह सोने की एक कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकला उसने गोपाल से पूछा क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है। गोपाल ने कहा कि यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है

फिर दूसरी बार देवदूत ने डुबकी लगाकर चांदी की कुल्हाड़ी निकाला तभी भी लकड़हारे ने इनकार करते हुए कहा नहीं यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है । देवदूत ने फिर डुबकी लगाई इस बार उसने नदी से लोहे की कुल्हाड़ी निकाला उस कुल्हाड़ी को देखते ही गोपाल बहुत खुशी से चिल्ला उठा हां महाराज यही मेरी कुल्हाड़ी है

गोपाल की ईमानदारी पर देवदूत बहुत खुश हुआ लोहे की कुल्हाड़ी के साथ साथ सोने और चांदी की कुल्हाड़ी भी देवदूत ने गोपाल को इनाम में दे दिया । और गोपाल ने देवदूत का बहुत आभार मान लिया ।

कहानी की सीख :

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर हम ईमानदार रहेंगे तो सब कुछ हमारे साथ अच्छा ही हो सकता है। क्योंकि ईमानदारी ही एक अच्छा गुण है । बेईमानी तो हर कोई करता है , मगर इस दुनिया में ईमानदारी से रहना ही सबसे बड़ा मीठा फल है।

अगर आज आप ईमानदारी से अपना जीवन व्यतीत करते हैं। तो कल यकीन माने आपके साथ अच्छा ही अच्छा होगा क्योंकि जो जैसा करता है, वैसा फल मिलता है। अगर आप ईमानदारी से रहेंगे तो उसका फल भी वैसा ही मिलेगा |

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