Krishna Janmashatmi 2024 : भगवान विष्णु ने धरती पर पाप और अधर्म का नाश करने के लिए हर युग में अवतार लिए है विष्णु जी के एक अवतार भगवान SHRIKRISHNA है। जिनका जन्म मथुरा की RAJKUMARI देवीकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में हुआ राजा कंश की जेल में जन्मे कान्हा का बचपन गोकुल में माता यशोदा और नंदबाबा की गोद में बीता राज्य कंश से बचने के लिए वासुदेव ने कान्हा के जन्म के बाद ही अपने चचेरे भाई नंदबाबा और यशोदा को दे दिए थे । नोटपैड क्या होता है
श्री कृष्ण कौन है ?
श्रीकृष्ण ने अपने जन्म से लेकर जीवन के हर पड़ाव पर चमत्कार दिखाएं श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई किस्से हैं जो मानव समाज को सीख देते हैं। अधर्म और पाप के खिलाफ सही मार्गदर्शन करते हैं , उनके जन्म दिवस को उत्सव कि तरह भक्त मनाते हैं इस मौके पर जाने कृष्ण जन्माष्टमी का इतिहास और महत्व क्या है ।
जन्माष्टमीकि बधाई कैसे दी जाती है ।
- देखो फिर कृष्ण जन्माष्टमी आयी है, माखन की हांडी ने फिर मिठास बढ़ाई है ।
- नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की
- गाय का माखन, यशोदा का दुलार, ब्रह्माण्ड के सितारे कन्हैया का श्रृंगार।
- आओ मिलकर सजाये नन्दलाल को, आओ मिलकर करें उनका गुणगान!
- कान्हा की लीला है सबसे प्यारी .
कृष्ण जन्माष्टमी कब है
कृष्ण जन्माष्टमी हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है । इस वर्ग के संग जन्माष्टमी का पर्व सोमवार के दिन 26 अगस्त 2024 को मनाया जाएगा । नरेंद्र मोदी के बारे में
कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व क्या है
पुराण के मुताबिक श्री कृष्णा त्रिदेव में से एक भगवान विष्णु के अवतार है । कृष्ण के आशीर्वाद और कृपा को पाने के लिए हर साल लोग कृष्ण जन्माष्टमी दिन का व्रत रखते हैं। मध्य रात्रि में विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं और भजन कीर्तन करते हैं और जन्म उत्सव मनाते हैं, इस दिन के लिए मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया जाता है कुछ स्थानों पर जन्माष्टमी पर दही हांडी का मटका का भी उत्सव होता है । blog post kaise लिखें
कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त श्रद्धांनुसार उपवास रखते हैं । भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
बाल गोपाल की जन्म मध्यरात्रि में हुआ था , इसलिए जन्माष्टमी की तिथि मध्यरात्रि को घर में मौजूद लड्डू गोपाल की प्रतिमा का जन्म कराया जाता है । फिर उन्हें स्नान कराकर सुंदर-वस्त्र धारण कराया जाता हैं फुल अर्पित कर धूप दीप से बंधन किया जाता है । कान्हा को भोग अर्पित किया जाता है । उन्हें दूध दही मक्खन विशेष पसंद है इसलिए भगवान को भोग लगाकर सबको प्रसाद वितरीत किया जाता है । google play store update
दही और हांडी कैसे मनाते हैं
कुछ जगहों पर कृष्ण जन्माष्टमी के दिन दही हांडी का आयोजन होता है । गुजरात और महाराष्ट्र में दही हांडी का विशेष महत्व है । दही हांडी का इतिहास बहुत दिलचस्प है बालपन में कान्हा बहुत नटखट थे । वह पूरे गांव में अपनी शरारतों के लिए प्रसिद्ध थे । कन्हैया को माखन दही और दूध बहुत प्रिय था उन्हें माखन इतना प्रिया था । कि वह अपने शाखा संग से मिलकर गांव के लोगों के घर का माखन चोरी करके खा जाते थे ।
कान्हा से मक्खन बचाने के लिए महिलाएं माखन की मटकी को ऊंचाई पर लटका दिया करती थी। लेकिन बाल गोपाल अपने मित्रों के साथ मिलकर एक पिरामिड बनाकर उसके जरिए माखन चोरी कर लेते थे, और खा जाते थे।
कृष्ण की इन्हीं शरारतों को याद करने के लिए जन्माष्टमी में माखन की मटकी को ऊंचाई पर टांग दिया जाता है . और लड़के नाचते गाते पिरामिड बनाते हुए मटकी तक पहुंच कर उसे तोड़ देते हैं इसे दही हांडी कहते हैं जो लड़का ऊपर तक जाता है । उसे गोविंदा कहा जाता है।
