clever formar story in hindi – एक समय की बात है, एक गांव में खड़क सिंह नाम का एक जागीरदार रहता था। वह बड़ा ही अमीर लेकिन घमंडी था। वह सिर्फ गांव के कुछ रईस लोगों से ही वास्ता रखना था। गांव में रहने वाले किसान वर्ग को तो वह देखना भी पसंद नहीं करता था।
उसने अपने माता हाथों को आदेश दे रखा था कि अगर कोई किसान उसके नजदीक आने की हिमाकत करें, तो उसे पर वह अपने खूंखार कुत्तों को छोड़ दे।

एक दिन कुछ मध्यम वर्ग के किस इकट्ठे होकर खड़क सिंह के बारे में चर्चा करने लगे। “मैं कल बाढ़ के ऊपर से झांका, तो जागीरदार साहब को आराम कुर्सी पर बैठकर काफी पीते देखा था” एक ने कहा। “मैंने जागीरदार खड़क सिंह को और भी नदी से देखा है, खेत में मेरी उनसे मुलाकात हुई थी”, दूसरे ने कहा।
तभी भोलू नामक किसान, जो बहुत गरीब था, उनके पास आया और कहने लगा, “यह कौन सी बड़ी बात है? बाढ़ के ऊपर से या खेत से तो कोई भी जागीरदार को देख सकता है।
चालाक किसान | clever formar story । short story in hindi
मैं तो अगर चाहूं, तो उसके साथ खाना भी खा सकता हूं।” “अरे, जाओ जाओ। जाकर आईना अपना मुंह देखो। वह तो तुम्हें घर के पास भी नहीं भड़कने देगा। सुना है, उसने घर की रखवाली के लिए खूंखार कुत्ते पाल रखे हैं, जो आदमी को पलक झपकते ही खा जाते हैं” दोनों किस बोले।
भोलू जब अपनी बात पर अड़क रहा, तो दोनों किसानों ने शर्त लगाते हुए कहा, “अगर तुम जागीरदार के साथ खाना खा लोगे, तो हम तुम्हें गेहूं की पांच बोरिया और नागौरी बैलों की एक जोड़ी देंगे। यदि तुम ऐसा नहीं कर पाए, तो तुम्हें हमारा कहां करना होगा।” भोलू ने शर्त मान ली। 500 हिंदी शॉर्ट स्टोरी बच्चों के लिए
भोलू दूसरे दिन खेत का काम खत्म करने के बाद खड़क सिंह के हाथों में पहुंच। जागीरदार के नौकरों ने जैसे ही भोलू को देखा, वह भाग कर बाहर आए और उसे वहां से खादर ने ने लगे। “जरा सुनो तो भाई! मैं जागीरदार साहब के लिए एक खुशखबरी लेकर आया हूं।” भोलू ने कहा।
नौकर ने कहा, “क्या खुशखबरी लाए हो?” भोलू ने उत्तर दिया, “यह खुशखबरी मैं केवल जागीरदार साहब को ही बताऊंगा।” जागीरदार साहब के नौकर अपने मालिक के पास गए और जो कुछ भोलू ने कहा था, का सुनाया।
हुजूर! में आपसे एकांत में बात करना चाहता हूं। short story hindi
जागीरदार को जिज्ञासा हुई कि यह पहला आदमी है, जो मुझे कुछ मांगने नहीं बल्कि देने आया है। उसे नौकरों से कहा कि उसे आने दिया जाए। यह आदेश पाकर नौकर ने भूलों को अंदर भेज दिया। जागीरदार ने कड़कती आवाज में भोलू से पूछा, “क्या खबर लाए हो?” भोलू ने नौकरों की ओर देखकर कहा, “हुजूर! में आपसे एकांत में बात करना चाहता हूं।” अब जागीरदार खड़क सिंह की जिज्ञासा चरण बिंदु पर पहुंच गई।
वह सोचने लगा कि जाने क्या कहना चाहता है? उसने नौकरों को जाने के लिए कहा। जैसे ही दोनों अकेले हुए वैसे ही भोलू किस ने धीरे से पूछा, “श्रीमान जी! मुझे बताएं की कृपा करें कि घोड़े के सिर के बराबर सोने के डाले की क्या कीमत होगी?”तुम यह क्यों जानना चाहते हो?” खड़क सिंह ने पूछा।
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भोलू ने उत्तर दिया, “इसका भी कारण है?” यह सुनकर जागीरदार की आंखें चमक उठी और वह उत्तेजना से हाथ मिलाने लगा। उसने मन में सोचा कि जरूर कोई खजाना इसके हाथ लग गया है।
जागीरदार ने किस से बात निकलवाने की चेष्टा की। “भले मानस! जरा यह तो बताओ कि तुम यह किस लिए जानना चाहते हो?” उसने फिर पूछा। भोलू ने भरकर कहा, “अगर नहीं बताना चाहते, तो ना सही। अच्छा तुम्हें चलता हूं जाकर खाना भी खाना है।” खड़क सिंह अब अपना सारा घमंड भूल गया .
उल्लू बनाकर सोना निकलवा लूंगा | clever former story in hindi
और लालच में आ गया। “मैं इस उल्लू बनाकर सोना निकलवा लूंगा।” उसने मन ही मन विचार। फिर भोलू से बोला, “सुनो तो भले मानस!तुम्हें घर जाने की ऐसी क्या जल्दी है? अगर तुम्हें भूख लगी है, तो तुम यही मेरे साथ खाना खा सकते हो।
आखिर तुम भी तो मेरे भाई जैसे हो।” इतना कह कर उसने अपने नौकरों से खाना लगाने को कहा। नौकरों ने फटाफट इमेज लगा दी।खड़क सिंह भोलू की ओर कभी एक और कभी दूसरी चीज बढ़ता हुआ कहने लगा, “भले मानस! खूब खाओ पियो, जरा भी टकलूफ ना करो। इसे अपना ही घर समझो।” बोलो ना जमकर खाना खाया।
खड़क सिंह उसकी थाली में खाने की चीज रखना जा रहा था। उसने जब पेट भरकर खा लिया, तो खड़क सिंह में प्यार से कहा, “अच्छा भोलू! अब तुम जाओ और घोड़े के सिर के बराबर का सोने का डाल ले आओ।
तुम्हारी तुलना में वह मेरे पास ज्यादा सुरक्षित रहेग। तुम्हें मैं इनाम में 100 का नोट दूंगा।” खड़क सिंह के बात सुनकर भोलू बोला, “नहीं श्रीमान! मैं सोने का डाला नहीं ला सकता।” खड़क सिंह बोला, वह क्यों ? भोलू ने उत्तर दिया, “क्योंकि वह मेरे पास है ही नहीं।” खड़क सिंह बोला, हैं ही नहीं।
तो तुम उसकी कीमत क्यों पूछ रहे थे?” भोलू ने कहा, “बस, जिज्ञासा बस।” यह सुनकर खड़क सिंह आग बबूला हो उठा। उसने गुस्से से लाल होकर कहा, “निकल यहां से, उल्लू कहीं के।” “श्रीमान! मैं ऐसा उल्लू नहीं हूं जैसा कि आप समझ रहे हैं।
आपके यहां मैं बढ़िया दावत का मजा लिया है और साथ में गेहूं की पांच बोरिया और नागोरी बैलों की एक जोड़ी जीती है। ऐसा करना किसी उल्लू के बस की बात नहीं।” ऐसा कर भोलू वहां से चला गया।
