लोमड़ी की चालाकी का फल | hindi short inspirational stories

hindi short inspirational stories : हेलो दोस्तों आज भी हम अच्छी सी एक कहानी सुनाते है। जिससे हमें कुछ ना कुछ अच्छा ही सीखने को मिलेगा जैसे कि हम कोई भी चालाकी करते हैं तो उसका फल भी हमें मिलेगा तो वह फल हमें कैसा मिलेगा और हमारा अच्छा होगा कि बुरा होगा वह सब हम इस कहानी में जानेंगे तो चलिए शुरू करते हैं कहानी जिसे आप भी कुछ ना कुछ समझ सकेंगे।

लोमड़ी की चालाकी का फल  hindi short inspirational stories

लोमड़ी की भूख (lomdi ki bhukh)

एक बहुत बड़ा जंगल था| जंगल में कई सारे पशु पंख रहते थे उसमें एक लोमड़ी भी थी। वह अच्छे से खाने पीने की शैकिन थी। एक दिन की बात है लोमड़ी बहुत भूखी होती है और खाने की शोध में इधर-उधर भटकती रहती है और भटकते भटकते एक गांव में आज चढ़ती है।

गांव के कुत्तों ने लोमड़ी को जैसे ही देखा तो सभी कुत्ते इकट्ठा होकर लोमड़ी के पीछे पड़ जाते हैं और लोमड़ी को वहां से भगाने लगते हैं।

कुत्तों से डर कर छिपना

 लोमड़ी भी कुत्तों से डर जाती है और वहां से दूर भागने लगती है भागते-भागते एक धोबी की कुटिया में जा चढ़ती है और उसमें जाकर धोबी ने रखे हुए बर्तन  जिसमें कलर रखा था उसी बर्तन में छिप जाती है।

 थोड़ी देर के बाद जब वह बाहर निकलती है तो लोमड़ी भूरे रंग के जानवर की तरह दिखने लगी। जैसे ही बाहर निकली तो वहां जो कुत्ते इकट्ठा हुए थे सब आपस में बोलने लगे कि यह वह लोमड़ी नहीं है चलो यहां से चले जाते हैं ।

लोमडी की होशियारी (claver fox story in hindi)

अब लोमड़ी तो अपनी होशियारी में आ गई क्योंकि लोमड़ी का रंग बदल गया था जंगल में वापस आती है जंगल में आकर शेर बाघ हिरण सभी प्राणी को देखते हैं पर जैसे ही सभी प्राणी के नजदीक यह लोमड़ी जाती है तो सभी प्राणी डरकर भाग जाते हैं ।

अब सभी प्राणी सोचने लगते हैं कि यह कौन सा जानवर है और अपने आप को समझाने लगते हैं कि हमें उसके सामने नहीं जाना चाहिए क्योंकि हमारे पास शायद उसके जितनी शक्ति हो या नहीं।

 यह सोचकर सभी प्राणी अब भुरी लोमड़ी के पास भी नहीं जाते थे सब डर रहे थे सबको डरा हुआ देखकर भुरी लोमड़ी ने कहा आप मुझसे दूर मत भागे और मुझसे डरिए भी नहीं। मैं भगवान का करिश्मा हूं। भगवान ने ही मुझे बनाया है और यह कह कर भेजा है कि जंगल के सभी प्राणियों में कोई शासक राजा नहीं है तुम वहां जाकर राजा बानो।

 मेरा नाम भी उन्होंने कुकूद्रम रखा है मैं भगवान के बोलने से ही यहां पर आई हूं और मुझे आप सब पर राज करने के लिए भेजा है आप सब सलामती से यहां जी सकते हैं मैं सभी का रक्षण करूंगी जंगल के सभी जानवरों ने भुरी लोमड़ी को अपना राजा मान लिया और कोई विरोध भी नहीं किया।

नए राजा का शासन

 नई राजा ने शेर को मंत्री बनाया ,बाघ को मैनेजर बनाया और हिरण को चौकीदार बना दिया। नई राजा ने जंगल में से सभी लोमड़ी को बाहर भेज दिया ।शेर, बाघ, हिरण जैसे प्राणियों छोटे प्राणी का शिकार करके राजा के लिए लाते और खुद भी अपने लिए कुछ रख देते।

 कितने महीनो तक बस ऐसा ही चला रहा भुरी लोमड़ी सब पर राज करती रही और सभी उसको राजा मानकर अपना कुछ ना कुछ खाना उसके साथ बाटते गए। 

खुद ही जाल में फसना

 एक दिन यह भुरी लोमड़ी राजा बनकर दरबार में बैठी ही थी तभी अचानक लोमड़ीयो के चिल्लाने की आवाज आई जो अलग ही तरीके से बोलते हैं।

 लोमड़ी खुशी में आ गई और अपने कुदरती स्वर में गाने लगा। शेर और बाघ तथा दूसरे प्राणी को पता चल गया कि यह राजा नहीं है यह तो सिर्फ एक लोमड़ी है जिसको भगवान ने नहीं भेजा है और गुस्से से सभी प्राणी उस पर टूट पड़े और लोमड़ी को मार डाला |

कहानी से सिख: 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपनी चालाकी को बस यहां तक ही रखना चाहिए कि हम दूसरों के साथ अपना काम निकलवा सके अगर ज्यादा चला कि हम करने की कोशिश करते हैं तो हमारा भी लोमड़ी की तरह ही अंत हो सकता है