short story in hindi – सेठ राधेश्याम ने बेलापुर से आए आगंतुक को अंदर बुलाया और पूछा कहो भाई क्या निवेदन करना चाहते हो किस ने दोनों हाथ जोड़कर कहा सेठ जी मेरा नाम दीनानाथ है मैं खेती बाड़ी का काम करता हूं अगली पूर्णिमा के दिन मेरी बेटी की बारात आने वाली है शादी में कुल चार-पांच दिन ही बच्चे हैं और मुझे ₹5000 का इंतजाम करना है आप तो जानते ही हैं कि इस साल आकार की छाया से हमारे खेतों की छाती धारक गई और एक भी दान अनाज का नहीं हुआ है .

ऐसे में हमारे लिए खाने-पीने के भी लाले पड़ रहे हैं अब मैं गरीब किसान ₹5000 कहां से लाऊं आपसे यही गुजारिश है कि आप मेरे खेतों को गिरवी रखकर मेरी बेटी की शादी के लिए मुझे ₹5000 दे दीजिए अगर उपयोग का इंतजाम ना हो पाया तो मेरी बेटी कुमारी ही रह जाएगी यह कहकर किसान अपनी माइली को चली पगड़ी अपने सर से उतर कर सेठ जी के पैरों में रखने लगा सेठ जी ने उसे ऐसा करने रोका .उपकार का मूल्य
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hindi short story – ₹5000 और जाकर धूमधाम से बेटी की शादी की तैयारी
और उसे अपने पास बिठाते हुए बोले भाई दीनानाथ पगड़ी मेरे पांव में रखकर मुझे शर्मिंदा न करो और तुम्हें अपने खेत खलियान भी मेरे पास बीवी रखने की जरूरत नहीं है यह को ₹5000 और जाकर धूमधाम से बेटी की शादी की तैयारी में जुट जाओ अरे मेरे सिर्फ दो बेटे हैं यही समझो कि यह रुपए मैं अपनी ही बेटी की शादी में कन्यादान के रूप में दे रहा हूंसेठ जी की बात सुनकर और उनसे रुपए लेते हुए दीनानाथ की आंखें चला कर आई उसने कहा सेठ जी आप तो सचमुच भगवान के अवतार हैं जैसा आपके बारे में सुना था
आपको उससे भी कहीं बढ़कर पाया यदि जीवित रहा तो एक दिन आपके इस उपकार का मूल्य में जरूर चुकाऊंगा यह कह कर दीनानाथ सेठ और सेठानी से भी दाल लेकर खुशी-खुशी अपने गांव लौट गया सेठ जी कृपा से उसकी बेटी की शादी धूमधाम से संपन्न हो गई और वह चिन्ह होकर अपना जीवन बिताने लगा इस घटना को कई वर्ष बीत गए सेठ राधेश्याम और दीनानाथ दोनों ही अपनी अपनी दिनचर्या में व्यस्त होकर इस घटना को भूल चुके थे एक दिन सेट राधेश्याम के छोटे बेटे चंदन का डाकू ने अपराह्न कर लिया .
सेठ जी को ₹100000 की फिरौती के लिए पत्र
और उसे बेलापुर के निकट जंगल में एक खंडहर मैं ले जाकर उसके हाथ पैर बांधकर एक टूटे-फूटे से कमरे में बंद कर दिया डाकुओं ने शहर जाकर सेठ जी को ₹100000 की फिरौती के लिए पत्र भेजा इधर सहयोग बस उसे दिन दीनानाथ जंगल के किनारे अपने खेतों की जुताई करने पहुंचा और जब उसे जंगल में स्थित खंडहर से किसी बच्चे के रोने की चिल्लाने की आवाज सुनाई दी तो उसने वहां जाकर देखा कि एक किशोर वह लड़का जिसके हाथ पर बने हुए थे जोर-जोर से रो रहा था दीनानाथ ने फुर्ती से उसके बंधन खोल .
और उसका परिचय पूछा जब उसे लड़के ने बताया कि वह सीन हर शाम का छोटा पुत्र है तो दीनानाथ को इस चांद सेठ जी का द्वारा उसे पर किए गए उपकार की आदत हो गई दीनानाथ ने चंदा से कहा बेटा अब डरने की कोई बात नहीं है मैं तुम्हारे पिताजी का ही कभी भी दोस्त हूं को पहन लो तुम यह कलेवा खा लो तुम्हें भूख लगी होगी इसके बाद मैं सुरक्षित तुम्हारे घर पहुंचा दूंगा दीनानाथ चंदन को लेकर समीप के थाने पहुंचे और इंस्पेक्टर को सारी कहानी बताई .
hindi short story – सूर्यभुज पर की प्रशंसा
इंस्पेक्टर ने दीनानाथ की सूर्यभुज पर की प्रशंसा की और चंदन को पुलिस संरक्षण में उसके घर भेज दिया उसके बाद खंडार में पुलिस तैनात करके वहां पहुंचने पर अपराध कर्ताओं को भी दबोच लिया गया चंद्र को सुरक्षित घर लौट देख सेठ सेठानी की आंखें भर आई और चंदन ने अपने माता-पिता को बेलापुर गांव केदारनाथ नामक एक किसान द्वारा उसके मुक्त करने की बात बताएं तो सेठ जी और सेठानी दीनानाथ के प्रति कृतज्ञता के भाव से भर उठे हैं आखिर का सेठ जी द्वारा किए गए उपकार का मूल्य दीनानाथ ने उसके छोटे बेटे को बदमाशों के चंगू से छुड़ाकर चुका दिया
