महाराज पृथ्वीराज चौहान और शाहबूद्दीन धोरी युद्ध : हम जानेंगे सम्राट पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) के बारे हैं जैसे की पृथ्वीराज चौहान का जन्म कब हुआ था पृथ्वीराज चौहान शाहबूद्दीन मोहम्मद धोरी के साथ कितनी बार युद्ध किया युद्ध की शुरुआत कहां से हुई और पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी (mohammad gori) की लड़ाई की मुख्य वजह क्या है?
पृथ्वीराज चौहान के जन्म की जानकारी: Prithviraj ka janam kab hua
पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 में अजमेर के राजा सोमेश्वर के घर हुआ था। गुजरात में जन्मे पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही पराक्रमी थे।माता का नाम कर्पूरा देवी था। पृथ्वीराज चौहान मात्र 11 वर्ष के थे जब पिता की मृत्यु के बाद राजगद्दी पर मां के साथ वह भी बैठते थे।नरेंद्र मोदी के बारे में
Prithviraj का राज्य शासन:
पृथ्वीराज ने शुरुआती दौर में आसपास के कई राज्यों में जीत हासिल करके सफलता पाई।
पृथ्वीराज चौहान ने राजस्थान हरियाणा दिल्ली मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश के कई जगह पर अपनी जीत का झंडा लहरा दिया था।
पृथ्वीराज चौहान ने अपनी राजधानी अजय मेरु को पसंद की थी जो हाल अजमेर के नाम से जाना जाता है।
हालांकि 1180 में पृथ्वीराज चौहान ने संपूर्ण कामकाज संभाला था।
पृथ्वीराज चौहान की लड़ाई कई राजाओं के साथ हुई थी फिर चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम राजा। पराक्रमी राजाओं के साथ भी लड़ाई हुई थी। जिसमें मोहम्मद धोरी का नाम पहले ही आता है क्योंकि पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद धोरी का तराई का युद्ध आज भी सभी की जुबान पर है।
पृथ्वीराज चौहान की शादी: Prithviraj chauhan ki shadi
पृथ्वीराज चौहान की पराक्रम की गाथा पूरे गुजरात में गूंज रही थी। साथ में ही पूरे भारत भर में पृथ्वीराज चौहान का नाम फैल रहा था ।इस बात को लेकर पद्मावती भी पृथ्वीराज चौहान के साथ शादी करने के लिए बोल रही थी।
पद्मावती विजयसूर नाम के राजा की पुत्री थी। विजयसुर समुद्र शिखर का राजा था। पृथ्वीराज ने पद्मावती के साथ शादी करने के बाद विजय सर से धन पाया ।बाद में पृथ्वीराज चौहान ने पद्मावती के साथ शादी करके थोड़े दिन समुद्र शिखर में बिताये।
Prithviraj chauhan & Shahabuddin Muhammad ghori War: महाराज पृथ्वीराज चौहान और शाहबूद्दीन धोरी युद्ध –
पहला युध्द (prithviraj chauhan ka pahla yuddh)
सम्राट पृथ्वीराज चौहान की लड़ाई शहाबुद्दीन मोहम्मद धोरी (shahabuddin muhammad ghori) नाम के बादशाह के साथ हुई थी।जो बहुत ही रोमांचक कहानी है ।जिसकी शुरुआत होती है चित्र रेखा नाम की दासी से ।चित्रलेखा बहुत ही सुंदर थी, गीत संगीत और नृत्य में भी पारंगत थी ।
शहाबुद्दीन धोरी चित्र रेखा से प्रेम करता था।आखिरकार चित्ररेखा तो नृत्यांगना ही थी । दरबार में शहाबुद्दीन धोरी का चचेरा भाई हुसैन खान था इन दोनों भाइयों के बीच में लड़ाई होती है क्योंकि चित्र रेखा हुसैन खान को प्रेम करती थी ।शहाबुद्दीन गोरी को जब पता चला तो उसने दरबार में हुसैन खान को बुलाकर बहुत ही सुनाया ।
हुसैन खान गुस्सा होकर चला गया और साथ में चित्र रेखा को भी ले गया और पृथ्वीराज चौहान के कस्बे में जाकर रहने लगा ।
जब शहाबुद्दीन को यह खबर हुई की हुसैन और चित्र रेखा हिंदुस्तान में गए हैं तो शहाबुद्दीन ने पृथ्वीराज चौहान को संदेश भिजवाया की हुसैन खान और चित्र रेखा दोनों मेरे गुनहगार है।
दोनों को छोड़ दो मगर यह तो हिंदू राजा था और हिंदू राजाओं का एक महत्व यह है कि शरणार्थी को कभी मना नहीं करते शहाबुद्दीन अफगानिस्तान से हिंदुस्तान जाता है और पृथ्वीराज चौहान से लड़ाई करने की सोच लेता है ।इस कारण से पृथ्वीराज चौहान और शहाबुद्दीन धोरी के बीच में लड़ाई होती है।
सम्राट पृथ्वीराज चौहान की लड़ाई शहाबुद्दीन धोरी (shahabuddin ghori) नाम के बादशाह के साथ हुई थी।जो बहुत ही रोमांचक कहानी है । जिसकी शुरुआत होती है चित्र रेखा नाम की दासी से ।चित्रलेखा बहुत ही सुंदर थी, गीत संगीत और नृत्य में भी पारंगत थी ।
बाबर कौन था और इसको किसने मारा
शहाबुद्दीन धोरी चित्र रेखा से प्रेम करता था।आखिरकार चित्ररेखा तो नृत्यांगना ही थी । दरबार में शहाबुद्दीन धोरी का चचेरा भाई हुसैन खान था इन दोनों भाइयों के बीच में लड़ाई होती है क्योंकि चित्र रेखा हुसैन खान को प्रेम करती थी ।शहाबुद्दीन गोरी को जब पता चला तो उसने दरबार में हुसैन खान को बुलाकर बहुत ही सुनाया ।

पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj chauhan ) और शहाबुद्दीन धोरी की संधि
हुसैन खान गुस्सा होकर चला गया और साथ में चित्र रेखा को भी ले गया और पृथ्वीराज चौहान के कस्बे में जाकर रहने लगा ।
जब शहाबुद्दीन को यह खबर हुई की हुसैन और चित्र रेखा हिंदुस्तान में गए हैं तो शहाबुद्दीन ने पृथ्वीराज चौहान को संदेश भिजवाया की हुसैन खान और चित्र रेखा दोनों मेरे गुनहगार है।
दोनों को छोड़ दो मगर यह तो हिंदू राजा था और हिंदू राजाओं (hindu king) का एक महत्व यह है कि शरणार्थी को कभी मना नहीं करते शहाबुद्दीन अफगानिस्तान से हिंदुस्तान जाता है और पृथ्वीराज चौहान से लड़ाई करने की सोच लेता है ।इस कारण से पृथ्वीराज चौहान और शहाबुद्दीन धोरी के बीच में लड़ाई होती है।
prithviraj chauhan death | who killed prithviraj chauhan
यह लड़ाई में prithviraj chauhan के 13 सैनिक और शहाबुद्दीन धोरी के 64 की मौत हो गई। 1 दिन में इतना खून खराबा होने के बाद भी यह लड़ाई रुकी नहीं दूसरे दिन और तीसरे दिन भी शाहबद्दीनने पृथ्वीराज पर हमला किया।
शहाबुद्दीन को इसी दौरान पृथ्वीराज चौहान के दो सरदारों ने पकड़ लिया और वहीं पर युद्ध समाप्त हुआ।
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पृथ्वीराज चौहान ने शहाबुद्दीन को एक महीना और तीन दिन कैद में रखा बाद में शहाबुद्दीन ने पृथ्वीराज के साथ संधि कर ली।
जिसमें शहाबुद्दीन ने 9700 घोड़े आठ हाथी 20 दल और हिरा ,मानिक ,मोती पृथ्वीराज को दिए ।उसके बाद पृथ्वीराज चौहान के दरबार से शहाबुद्दीन गोरी अफगानिस्तान रवाना हुआ।
दुसरा युद्ध (prithviraj chauhan ka dusra yuddh)
पृथ्वीराज चौहान की मां का नाम कमला देवी था और कमला देवी के पिता का नाम अनगपाल था। वही अनगपाल ने पृथ्वीराज चौहान को पूरा राज्य सौंप कर तप करने चले गए।
पृथ्वीराज को तब अभिमान आ गया और अनगपाल के लोगों को परेशान करने लगा ।इन लोगों ने बद्रिकाश्रम जाकर अनगपाल को सब बताया उसके बाद पृथ्वीराज चौहान से मिलने गए।
जिसमें पृथ्वीराज चौहान ने अनगपाल का अपमान किया जिसमें अनगपाल ने शहाबुद्दीन धोरी को मिलने के लिए कहा शहाबुद्दीन को पृथ्वीराज चौहान पर गुस्सा तो था ही इसीलिए शहाबुद्दीन ने अनगपाल की मदद करने के लिए तैयार हो गया।
फिर एक बार शहाबुद्दीन धोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच युद्ध हुआ युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने शहाबुद्दीन और अनगपाल को पकड़ लिया। पृथ्वीराज चौहान ने अपने दादा के पैर छुए और ऊंचे आसन पर बिठाया।
और दादा से पूछा कि आप साबुद्दीन धोरी के पास मदद मांगने के लिए क्यों गए थे?
ऐसा सुनते ही अनगपाल की आंखें शर्म से झुक गई फिर एक बार शहाबुद्दीन धोरी को दंड भरना पड़ा। जिसमें 20 हाथी ,सो घोड़े ₹200000 थे। इस तरह शहाबुद्दीन धोरी और पृथ्वीराज चौहान की लड़ाई बहुत ही रसप्रद रही है।
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