पक्षी का प्रेम | Short Story in hindi

एक छोटा सा सुंदर पक्षी था| यह पक्षी बगीचे में खिले हुए सफेद फूल पर ही मंडरा रहता है|एक दिन फुल ,पक्षी से पूछता है ,”तुम मुझ पर ही क्यों मंडरा रहे हो,मुझसे दूर क्यों नहीं जा रहे हो, मैं तुमसे तंग आ गया हूं|”

पक्षी ने तो हंसते-हंसते कहा” पता नहीं मगर मुझे तुमसे दूर जाने का मन ही नहीं करता है|मुझे बस ऐसे होता है कि मैं एक पल भी तुमसे दूर ना रहूं और मेरी नजरों से तुम्हें दूर ना करू|”

फूल को लगा कि यह तो मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहा है| बस मुझे बहुत तंग कर रहा है| मुझे कुछ करके इसको अपने से दूर करना ही पड़ेगा|

तब जाकर फूल पक्षी को कहता है कि,”अगर तुम मेरे साथ हमेशा के लिए रहना चाहते हो तो यह काम करना पड़ेगा|” पक्षी बहुत ही खुश हो गया उसको तो जैसे स्वर्ग ही मिल गया हो इतनी खुशी हो रही थी| पंखी ने तुरंत ही कहा,” हां मैं आपके साथ ही रहना चाहता हूं|”

सफेद फूल बोलता है,” अभी मैं सफेद हूं जब मैं लाल हो जाऊं तब हम दोनों एक साथ रहेंगे|” यह सुनकर पक्षी नाचने कूदने और गाने लगा|

फूल तो सोचता ही रह गया कि।” मैं तो सफेद हूं लाल तो कभी होगा ही नहीं| मेरा रंग तो नहीं बदल सकता फिर भी ये इतना नाच क्यों रहा है? मैं तो सिर्फ इससे पीछा छुड़ाने के लिए बोल रहा था| मैं थोड़ी ना लाल हो जाऊंगा| लगता है की पक्षी की बुद्धि काम नहीं कर रही है|”

सफेद फूल के साथ बहुत ही कांटे थे| पक्षी नाच नाच कर अपने शरीर पर कांटा चुभता चला गया| मतलब की कांटों से अपने शरीर को टकराता रहा|

पक्षी का प्रेम | Short Story in hindi
पक्षी का प्रेम | a Short Story in hindi

पक्षी के शरीर में घाव लगने के कारण खून निकलने लगा और खून सफेद फूल पर गिरने लगा धीरे-धीरे करके फूल लाल हो गया| थोड़ी देर बाद पंखी का पूरा शरीर ही छंनी जैसा हो गया तब तक फूल लाल हो गया था|

फूल को समझ में आ गया कीपक्षी उसको कितना प्रेम कर रहा था| फुल घायल पक्षी के पास जाकर अपने प्रेम का इजहार करने झुकता है और कहता है,” दोस्त मुझे माफ कर दे मैं तुम्हारे प्रेम को नहीं समझ सका तुम्हारे प्रेम को सिर्फ एक मजाक हीं समझ रहा था|अब मुझे तुम्हारा प्रेम समझ में आ रहा है| मैं भी तुम्हें प्रेम करता हूं दोस्त|”

फूल बोलता ही चला जा रहा है पर सामने से कोई जवाब ही नहीं आ रहा तब फूल को पता चला की बहुत देर हो चुकी है पक्षी मर चुका था|

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हमारे जीवन में भी ऐसी कितनी घटनाएं होती है कि हम हमसे जुड़े लोग और हमसे प्रेम करने वाले लोगों को समझ नहीं सकते और सिर्फ एक मजाक समझते हैं| जब हमें पता चलता है तब तक बहुत ही देर हो चुकी होती है|

दुख: की गठरी | a village boy story in hindi

एक छोटा सा गांव था| गांव में एक मोहन नाम का लड़का रहता था| जो हमेशा शिकायत ही करता रहता था कि भगवान मुझे कुछ नहीं मिला भगवान मेरे पास कुछ नहीं है| आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? फरियाद ही करता रहता था जब सोता तब फरियाद करता|

मोहन ने कहा,” मेरे गांव के सभी लोग खुश जीवन जी रहे हैं|मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है|

मोहन रात को सोता है| तब मोहन को एक स्वप्न आता है| स्वप्न में देखा है कि एक बहुत बड़ा महल है और उसे महल में गांव गांव के सभी लोग इकट्ठा हुए हैं|

गांव के सभी लोगों को बोला गया है कि अपने दुखों की पोटली साथ में लेते आना| सभी लोग गठरी लेकर वहां खड़े थे| गरीब आदमी की कहानी

सभी अपने दुखों की गठरी लाए थे| मगर मोहन को बहुत ही आश्चर्य हुआ क्योंकि मोहन गांव में जिसको सुखी समझ रहा था वह भी अपनी बड़ी-बड़ी दुख की गठरिया लेकर आए थे|

ज्यादा समझ में ही नहीं आया तब मोहन ने देखा कि मंदिर के पुजारी भी दुखी होकर अपनी दुख की गठरी लाए थे| यहां तक की गांव के सबसे अमीर नगर शेठ भी अपनी दुख की गठरी लेकर आए थे|

जब सब इकट्ठा हो गए तब आकाशवाणी हुई ,“अब आप सभी लोग अपने दुखों की गठरी दीवाल में लगे हुए खींचे से तंग दो|” सभी लोग अपने दुखों की गठरी को घंटे से टांगने के लिए दौड़े और अपने-अपने दुख की पोटली को दीवार पर लगा दिया|

थोड़ी देर बाद फिर आकाशवाणी हुई,” आप लोगों को जिसकी दुख की गठरी चाहिए वह उठा सकते हैं| सभी लोगों को अपने-अपने दुखों की गठरी बदलने की छूट है|

मोहन तो सपना देख रहा था| स्वप्न में भी मोहन को लगा कि,” मैं गांव के नगर सेठ की गठरी ही उठा लेता हूं|” दूसरे ही क्षण मोहन को ख्याल आता है कि,” नगर सेठ की गठरी में किस तरह का दुख है वह भी मुझे पता नहीं है .

कम से कम मेरी दूसरी गठरी का दुख मुझे पता तो है और मैं अपने दुख के साथ लंबे समय से रह रहा हूं उसे कारण मुझे अभी डर भी नहीं लगता और मैं वह दुख से लड़ सकता हूं|”

मोहन ज्यादा नहीं सोच कर दौड़ कर गया और अपने दुख की गठरी कोई लेकर न जाए उसके पहले ही ले ली और सर पर रखकर चला गया| सभी लोगों ने भी यही किया अपने-अपने दुख की गठरी ही ली\

तब फिर से आकाशवाणी होती है,” अरे! यह गठरी मुझे देने के बजाय तुम अपने साथ लेकर जा रहे हो|” यही गलती सभी लोग करते हैं| हमें भगवान के सामने दुख रखकर सिर्फ खुशी लेकर ही जाना चाहिए मगर लोग अपने सिर पर दुख लेकर ही चलना चाहते हैं| इसीलिए शायद लोग खुश नहीं रह सकते|

इस कहानी से मैं यह कहना चाहती हूं कि अगर हम अपने दुख अपनी परेशानी सभी भगवान को अर्पण करके अपना सिर्फ कर्म करें औरअपना फर्ज निभाएं तो हम दुनिया में बहुत ही खुशनसीब कहलाएंगे|

बदलीपुर की टीम

एक गांव था| जिसका नाम बदलीपुर था| बदलीपुर में खूबी लाल नामक एक लड़का रहता था| जिसको अपने रूप रंग का बहुत ही अभिमान था|

 इस गांव में विवेक नाम का एक लड़का रहता था| जो खूबी लाल के दिखावे से बहुत ही उदास रहता था क्योंकि विवेक मोटा लड़का था| खूबी लाल एकदम हीरे की तरह दिखता था| जैसे की ऊंचा कद , लहराते बाल और बढ़िया था |

खूबी लाल हाथी पर बच्चों को बिठाकर बदलीपुर में घूमता था और पैसे कमाता था |खूबी लाल हाथी को चराने के लिए विवेक के खेत में छोड़ जाता था| जहां विवेक पूरा दिन हाथी को रखता था और शाम को खूबी लाल को दे देता था|

एक दिन खूबी लाल विवेक के पास आकर कहता है, “ओ ! हाथी मेरे हाथी को अच्छे से रखना|” विवेक को बहुत बुरा लगा क्योंकि खूबी लाल ने विवेक को हाथी जैसा कहा था|

मगर विवेक तो खूबी लाल की तरह दिखना चाहता था तभी विवेक सोचता है मैं भी खूबी लाल की तरह क्यों नहीं दिखता? अगर मैं ऐसा दिखता तो मुझे कोई हाथी ही नहीं कहता| खूबीलाल कितना सुंदर है, इसीलिए सब उसको पसंद करते हैं और इस वजह से खूबी लाल भी खुश रहता है|

हाथी की चोरी

एक दिन खूबीलाल रोते हुए मित्रों के पास जाता है, और कहता है कि मेरा हाथी किसी ने चुरा लिया है |तभी खूबी लाल के दोस्त कहते हैं,” क्या हुआ हाथी कैसे गुम हो गया”? खूबी लाल कहता है,” मैं रोज हाथी को हाथी के खेत में छोड़ने जाता था|

तभी उसका मित्र कहता है,” हाथी के खेत में वो कोन है ?”खूबीलाल कहता है,” आप लोग नहीं जानते| वह मोटा सा लड़का है” विवेक” वही तभी तारा कहती है कि,” तुम्हें इस तरह से विवेक की मजाक नहीं करनी चाहिए| तुमने तो एक शब्द बोल दिया मगर जो सुनने वाला है उसके मन में कितना बुरा लग शकता है | वह तुम्हें नहीं पता| तुम्हारी इस हरकत से विवेक अपने आप को छोटा समझने लगा है और छोटा बन के रह रहा है|”

” लोग अपना आत्मविश्वास भी खो बैठते हैं, इसलिए आगे से किसी को ऐसे मत चिढ़ाना समझ गए, और सोच समझ कर ही बोलना|”

खूबी लाल कहता है कि,” रोज मेरा हाथी शाम को घर आ जाता है मगर आज नहीं आया तो, मैं लेने गया तब विवेक ने कहा,” मुझे हाथी का कुछ पता नहीं| वह तो कब से यहां से निकल गया है|”

खूबी लाल रोते हुए कहता है,” मुझे पता नहीं है मेरा हाथी कहां है? बस मुझे अपना हाथी चाहिए|”

तब किटी कहती है,” मुझे पता है तुम्हारा हाथी कहां है|”

खूबी लाल कहता है,” कहां है ?”

किटी ने कहा,” चलो मेरे साथ मुझे पता है तुम्हारा हाथी किसने चुराया है|

तारा कहती है,” मैं किटी की बात समझ गई|”

फिर सभी विवेक के घर जाते हैं और खूबी लाल कहता है,” विवेक मुझे मेरा हाथी दे|”

विवेक कहता है,” मेरे पास हाथी नहीं है| हाथी तो कब का यहां से चला गया है|”

अदरक कहता है,” विवेक तुम डरो नहीं हम तुम्हें कुछ नहीं करेंगे|”

विवेक क्यों भागा ?

तब विवेक भागने लगता है किटी और अदरक उसे पकड़ते हैं और कहते हैं कि,” तुम भाग क्यों रहे हो?” तब खूबी लाल की सभी कड़वी बातों का असर विवेक पर क्या होता है वह विवेक अपने मुंह से बताता है|

विवेक कहता है कि,” देखो खूबी लाल की बॉडी देखो उसके बाल देखो कितने सुंदर है| खूबी लाल मुझे हाथी कहता है तब मुझे बहुत बुरा लगता है,उसका आपको पता ही नहीं इसी स्थिति में मैं अपने आप को खूबी लाल के जैसा दिखना चाहता हूं तो क्या बुरा है?

पहले मैं सोचता था कि मैं कितना काला हूं और पाउडर लगाने के बाद अच्छा बन सकता हु मगर कुछ फर्क नहीं पडा| उसमें खूबी लाल जले पर नमक छिड़कता है कहता है कि” हाथी” मेरे हाथी को संभालना|”

विवेककी सब बात सुनकर किटी, तारा और अदरक भी उदास हो जाते हैं और कहते हैं कि किसी को भी अपने दिखावे पर कभी चिढ़ाना नहीं चाहिए|

विवेक कहता है कि,” मैंने यही था सोचा कि मैं खूबी लाल के जैसा दिख नहीं सकता मगर खूबी लाल को मेरी तरह उदास तो बने सकता हूं इसलिए मैंने हाथी को छिपा दिया|”

विवेक की बात सुनकर सब ने पूरी बात ही समझ ली अदरक ने विवेक को समझाया कि,” तुम अपने आप की तुलना किसी से क्यों करते हो देखो मैं भी कितना काला हूं मैं भी कभी-कभी अपनी तुलना दूसरों से करता हूं क्योंकि यह तो सामान्य बात है सभी लोग यहां ऐसा ही करते हैं मगर मैं अपने आप को समझाता रहता हूं कि हर एक व्यक्ति खास है| इसीलिए मुझे इन बातों से बुरा नहीं लगता|”

आगे खूबी लाल चारों से माफी मांगता है और विवेक को कहता है,” विवेक मुझे माफ कर दो मैं तुम्हारे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए|”

हमें भी अपनी तुलना किसी के साथ नहीं करनी चाहिए| भगवान ने सभी को कुछ ना कुछ खूबियो के साथ ही भेजा है| हमारे अंदर क्या खूबी है वह हमें खोज कर इस पर आगे बढ़ना चाहिए ना कि दूसरों की खूबी को देखकर अपने आप को छोटा समझना चाहिए| क्योंकि कोई दिखने में अच्छा है, तो कोई ताकत में अच्छा है| इसी तरह हमें अंदर की खूबी क्या है वह देखकर और अपने आप को निखारना चाहिए ऐसा करके हम आगे बढ़ सकते हैं|

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