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Aurangzeb का इतिहास और औरंगजेब को किसने मारा था | the end of mughal empire

the end of mughal empire – मुगल वंशजों का आखिरी राज करने वाला वंशज औरंगजेब (aurangzeb) के नाम से जाना जाता है| तो आज हम औरंगजेब की कहानी आपको बताने वाले हैं| जिसमें हम औरंगजेब के पिता का नाम, माता का नाम, धार्मिक नीति, युद्ध नीति, और aurangzeb को किसने मारा था .

Aurangzeb का इतिहास और औरंगजेब को किसने मारा था  the end of mughal empire

आज हम Aurangzeb और mughal shasan End के बारे में पूरी सम्पूर्ण जानकारी के ऊपर बात और वर्णन करेंगे। सबसे aurangzeb के जन्म से शुरू करते हैं –

औरंगजेब का जन्म कब हुआ | Aurangzeb ka janm kahan hua tha

औरंगजेब का जन्म 3 नवंबर 1618 में भारत के गुजरात राज्य के दाहोद जिले में स्थित एक नगर है यह जिले का मुख्यालय मे हुआ था| दाहोद जिल्ला ऐसा है जहां मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान यह तीनों राज्यों की बॉर्डर आती है| वहीं पर औरंगजेब का जन्म हुआ था| औरंगजेब छठवां मुगल राजा था| मुगल राज्य की शुरुआत करने वाला बाबर था|

औरंगजेब का पूरा नाम | Aurangzeb ka pura naam kya hai

औरंगजेब का नाम तो सब कोई जानता है मगर हम आपको औरंगजेब का पूरा नाम बताएंगे| औरंगजेब का पूरा नाम मुहिउद्दीन मोहम्मद था|

औरंगजेब के पिता का नाम क्या था | Aurangzeb ke pita ka kya naam tha

औरंगजेब के पिता का नाम शाहजहां था जो पांचवे मुगल बादशाह थे|| शाहजहां न्याय प्रिय था और वैभव विलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय थे किंतु इतिहास में उनका नाम केवल इसी कारण नहीं लिया जाता| शाहजहां का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर भी लिया जाता है जिसने अपनी बेगम मुमताज के लिए विश्व की सबसे खूबसूरत इमारत ताजमहल बनाने का काम किया है|

औरंगजेब के माता का नाम क्या था | Aurangzeb ke mata ka naam kya tha

आइए हम जानते हैं औरंगजेब की माता का नाम मुमताज महल जो अर्जुम्मन बानो बेगम के नाम से भी प्रचलित है मुमताज महल का जन्म 1593 में आगरा में हुआ था| इनके पिता का नाम अब्दुल हसन और सब खान था जो एक पारसी सज्जनर थे| 19 साल की उम्र में अर्जुम्मन का निकाह शाहजहां से 10 मई 1612 को हुआ था|

औरंगजेब किसका बेटा था | Aurangzeb kiska ladka tha | aurangzeb kiska beta hai | aurangzeb kiska putra tha

औरंगजेब शाहजहां का बेटा था| जिसने ताजमहल जैसा अजूबा बनवाया था|

औरंगजेब का पुत्र कौन था | Aurangzeb ka putra kaun tha | Aurangzeb ka putra kaun hai

औरंगजेब के कई पुत्र थे| जिसमें बेटा और बेटी दोनों ही आ जाते हैं| जेबुन्निसा जो सबसे बड़ी औलाद थी वह एक कवियत्री भी थी|

Aurangzeb ke putra ka naam

मोहम्मद सुल्तान जो औरंगजेब और उनकी दूसरी पत्नी नवाब बाई के सबसे बड़े पुत्र थे| उसका छोटा भाई मोअज्जम के उपनाम से 1707 में मुगल सम्राट बना जब औरंगजेब की मृत्यु हुई थी|

जीनत उल निशा बेगम जो औरंगजेब और उनकी मुख्य पत्नी दिलरस बानो बेगम की दूसरी बेटी थी उनके पिता ने उन्हें पदशाह बेगम की सम्मानजनक उपाधि प्रदान की थी|

बहादुर शाह प्रथम दिल्ली का सातवां मुगल बादशाह बना| जो औरंगजेब का दूसरा पुत्र था|

शहजादी बद्र उन्नीसा बेगम साहिबा वह औरंगजेब और नवाब बाई की बेटी थी| वह भविष्य के मुगल सम्राट मुजम बहादुर शाह की बहन थी| उनकी मौत 1670 में लाहौर में हुई|

जुब्दत्त उन निशा जो औरंगजेब की बेटी थी| इसका आगे कोई जिक्र नहीं किया गया है|

कुतुबुद्दीन मोहम्मद आजम जिसे आमतौर पर आजमशाह के नाम से जाना जाता है वह छठे मुगल बादशाह औरंगजेब और उनकी पत्नी दिल रख बानो बेगम के तीसरे पुत्र थे|

मोहम्मद अकबर औरंगजेब का चौथा पुत्र था और ‘अकबर द्वितीय‘ के नाम से इतिहास में जाना जाता है| उसने अपने पिता औरंगजेब के विरुद्ध विद्रोह कर सम्राट बनने की कोशिश की जिसमें उसे सफलता नहीं मिली|

मेहरून्निसा औरंगजेब की सबसे सुंदर पुत्री थी | उनकी शिक्षा-दीक्षा उनके अपने ही महल उदयपुर में हुई थी| मेहरून्निसा जब 5 साल की थी तभी तैरना सीख लिया था| एक बार वह यमुना नदी में तैराकी करने गई हुई थी तब उनकी उम्र 18 पड़ाव पर थी

मोहम्मद कामबख्स यह औरंगजेब का पुत्र था जिसको बहादुर शाह ने बीजापुर के युद्ध में मार डाला|

औरंगजेब का बेटा कौन था | Aurangzeb ka beta kaun tha | aurangzeb ka beta ka naam kya hai

औरंगजेब का नाम रोशन करने वाला बेटा सुल्तान मोहम्मद अकबर था|

औरंगजेब के कितने पुत्र थे.

औरंगजेब के 10 बच्चे थे| जिसमें पांच बेटी और पांच बेटे थे| सबसे सुंदर बेटी मेहरून्निसा थे| जिसका जिक्र हम कई बार सुन चुके हैं|

औरंगजेब और संगीत

औरंगजेब को कट्टरपंथी साबित करने की कोशिश में एक बड़ा तर्क यह भी दिया जाता है कि उन्होंने संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन यह बात भी सही नहीं है|

कैथरीन बताती है कि सल्तनत में तो क्या संगीत पर उन्होंने दरबार में भी प्रतिबंध नहीं लगाया था| शहंशाह ने जिस दिन राजगद्दी संभाली थी उसी दिन हर साल उत्सव मनाया जाता था|जिसमे में खूब नाच गाना होता था|

कुछ ऐतिहासिक तथ्य इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि औरंगजेब खुद संगीत के अच्छे जानकार थे| मीरात ए आलम में बख्तावर खान ने लिखा है कि औरंगजेब को संगीत विशारद जैसा ज्ञान था|

मुगल विद्वान फकीर उल्लाह ने राग दर्पण नाम के दस्तावेज में औरंगजेब के पसंदीदा गायों को और वादको के नाम दर्ज किए है|

औरंगजेब को अपने बेटों में आजमशाह बहुत प्रिय थे और इतिहास बताता है कि औरंगजेब अपने पिता के जीवनकाल में ही निपुण संगीतकार बन चुके थे|

औरंगजेब के शासनकाल में संगीत के फलने फूलने की बात करते हुए कैथरीन दिखती है,’ 500 साल के पूरे मुगल काल की तुलना में औरंगजेब के समय फारसी में संगीत पर सबसे ज्यादा टीका लिखी गई|

हालांकि यह बात सही है कि अपने जीवन के अंतिम दिनों में औरंगजेब ज्यादा धार्मिक हो गए थे और उन्होंने गीत संगीत से दूरी बना ली थी|

लेकिन ऊपर हमने जिन बातों का जिक्र किया है उसे देखते हुए यह माना जा सकता है कि उन्होंने कभी अपनी निजी इच्छा को सल्तनत की आधिकारिक नीति नहीं बनाया|

औरंगजेब की दक्षिण नीति क्या थी. | Aurangzeb ka samrajya vistar | aurangzeb ka shasan

मुगल प्रथाओं के अनुसार शाहजहां ने 1634 में शहजादे औरंगजेब को दक्षिण का सूबेदार नियुक्त किया| औरंगजेब खडकी (महाराष्ट्र) को गया जिसका नाम बदलकर उसमें औरंगाबाद कर दिया| 1637 में उन्होंने रबिया दुर्रानी से विवाह किया|

इधर शाहजहां मुगल दरबार का कामकाज अपने बेटे द्वारा सिखों को सौंपने लगा| 1644 में औरंगजेब की बहन एक दुर्घटना में जलकर मर गई| औरंगजेब इस घटना के 3 हफ्तों बाद आगरा आया| जिससे उनके पिता शाहजहां को उस पर बहुत क्रोध आया|

उसने औरंगजेब को दक्षिण के सूबेदार के पद से निलंबित कर दिया| औरंगजेब 7 महीनों तक दरबार नहीं आया| बाद में शाहजहां ने उसे गुजरात का सूबेदार बना दिया|

औरंगजेब ने सुचारू रूप से शासन किया और उससे इसका परिणाम भी मिला उसे बदख्नशान और बाल्ख क्षेत्र का सूबेदार बना दिया गया |

इसके बाद उन्हें मुल्तान का भी सूबेदार बनाया गया|

इस दौरान वे फारस के सफवियों कंधार पर नियंत्रण के लिए लड़ते रहे| पर उन्हें पराजय के अलावा और कुछ मिला तो वह था अपने पिता की उपेक्षा|

1652 में उन्हें दक्षिण का सूबेदार पुनः बनाया गया|

उन्होंने गोलकुंडा और बीजापुर के विरुद्ध लड़ाईया की और निर्णायक क्षण पर शाहजहां ने सेना वापस बुला ली| इससे औरंगजेब को बहुत ठेस पहुंची क्योंकि शाहजहां ऐसे उनके भाई शिकोंह के द्वारा कहने पर कर रहे थे|

औरंगजेब को दक्षिण में बहुत ही संघर्ष रहा| औरंगजेब के शासन काल में युद्ध विद्रोह ,दमन ,चढ़ाई इत्यादि का ताता लगा रहा| मराठाओ की संख्या और शक्ति में बढ़ोतरी हो रही थी|

दक्षिण में बीजापुर और गोलकुंडा को अंततः उन्होंने पराजित कर दिया|

औरंगजेब और शिवाजी का युद्ध | Aurangzeb aur shivaji maharaj

औरंगजेब की सेना में वरिष्ठ पदों पर बड़ी संख्या में कई राजपूत नियुक्त थे| मराठाओ और सिखों के खिलाफ औरंगजेब के हमले को धार्मिक चश्मे से देखा जाता है| लेकिन यह निष्कर्ष निकालते वक्त इस बात की उपेक्षा कर दी जाती है कि तब इस क्षेत्र में मुगल सेना की कमान अक्सर राजपूत सेनापति के हाथ में होती थी|

इतिहासकार यदुनाथ सरकार लिखते हैं कि एक समय एक छोटी और अस्थाई अवधि के लिए खुद छत्रपति शिवाजी भी औरंगजेब की सेना में मनसबदार थे|

इस बीच छत्रपति शिवाजी महाराज की मराठा सेना ने औरंगजेब के नाक में दम कर दिया था|

उसके बाद शिवाजी महाराज को औरंगजेब ने गिरफ्तार कर लिया| मगर शिवाजी महाराज और पुत्र संभाजी महाराज के भाग जाने पर औरंगजेब बहुत चिंतित हो गया|

शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद भी मराठा औरंगजेब को युद्ध के लिए ललकारते रहे|

औरंगजेब की धार्मिक नीति | Aurangzeb ki dharmik niti ka mulyankan

सम्राट औरंगजेब ने इस्लाम धर्म के महत्व को स्वीकारते हुए कुरान को अपने शासन का आधार बनाया| उन्होंने सिक्कों पर कलमा खुदवाना, नौरोज का त्योहार मनाना, गाना बजाना आदि पर रोक लगा दी|

1663 में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया| तीर्थ कर पुनः लगाया| अपने शासनकाल के 11 वर्ष में ‘झरोखा दर्शन‘ 12 वे वर्ष में ‘तुलादान प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया|

1668 में हिंदू त्योहारों पर प्रतिबंध लगा दिया| 1699 में उन्होंने हिंदू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया| बड़े बड़े नगरों में औरंगजेब द्वारा ‘मुहतसिब‘ को नियुक्त किया गया| 1669 में औरंगजेब ने बनारस के विश्वनाथ मंदिर एवं मथुरा के केशवराय मंदिर को तुड़वा दिया|

उन्होंने शरीयत के विरुद्ध लिए जाने वाले करो को समाप्त करवा दिया| इन्हीं में ‘आबवाब‘ नाम से जाना जाने वाला ‘रायदारी’ और ‘पानडारी‘ नामक स्थानीय कर भी शामिल थे|

औरंगजेब के समय में ब्रज में जाने वाले तीर्थ यात्रियों पर भारी कर लगाया जाता था| जजिया कर फिर से लगाया गया और हिंदुओं को मुसलमान बनाया गया| उस समय के कवियों की रचनाओं में औरंगजेब के अत्याचारों का उल्लेख है|

औरंगजेब की मृत्यु कब हुई थी | aurangzeb ki mrityu kaise hui | aurangzeb ki mrityu kahan hui

aurangzeb ki mrityu kab aur kaise hui – औरंगजेब के अंतिम समय में दक्षिण के मराठों का जोर बहुत बढ़ गया था| उन्हें दबाने में शाही सेना को सफलता नहीं मिल रही थी|

इसलिए सन 1683 में औरंगजेब स्वयं सेना लेकर दक्षिण गए| वह राजधानी से दूर रहते हुए अपने शासनकाल के लगभग अंतिम 25 वर्षों तक उसी अभियान में रहे 50 वर्ष तक शासन करने के बाद औरंगजेब की मृत्यु दक्षिण के अहमदनगर में 3 मार्च 1707ई. में हो गई|

दौलताबाद में स्थित फकीर बुरहानुद्दीन की कब्र के अहाते में उन्हें दफनाया गया| उनकी नीति ने इतने विरोधी पैदा कर दिए थे जिसके कारण मुगल साम्राज्य का अंत ही हो गया| हालांकि औरंगजेब खुद को हिंदुस्तान का शहंशाह मानते थे|

औरंगजेब को किसने मारा था | Aurangzeb ki mrityu kisne ki | Aurangzeb ki maut kab hui

औरंगजेब के अत्याचारों से कई राजपूत उनके खिलाफ हो गए थे| और अंत में मराठाओ ने भी युद्ध छेड़ दिया था| क्योंकि औरंगजेब धार्मिक स्थानों को भी तोड़ने से बाज नहीं आता था| औरंगजेब के कई युद्ध होते रहे जिसमें बुंदेला वीर छत्रसाल के हाथों औरंगजेब की मौत हुई|

औरंगजेब का मकबरा | Aurangzeb ka makbara kahan hai

औरंगजेब के पास दौलत बहुत थी मगर खुद की कब्र के बारे में औरंगजेब के खयालात अलग थे| औरंगजेब ने खुद की कब्र के बारे में ऐसा लिखा था कि वह बहुत ही सीधी-सादी बनाई जाए| औरंगजेब की कब्र औरंगाबाद जिले के खुल्दाबाद में स्थित है|

औरंगजेब का इतिहास हिंदी | Aurangzeb ka itihas in hindi

औरंगजेब की कहानी की समीक्षा करें तो हमे पता चलता है और औरंगजेब के बारे में दी गई जानकारी से हम यह कह सकते हैं कि औरंगजेब अपने दादा – परदादा ओं की तरह बिल्कुल नहीं था|

औरंगजेब को अपने पिता शाहजहां की उपेक्षा बहुत सहन करनी पड़ी थी| जिन्होंने हिंदुओं के लिए भी दया की नीति रखी थी| औरंगजेब के बारे में एक अच्छी बात यह कर सकते हैं कि वह संगीत का बहुत शौकीन था अपने दरबार में संगीतकारों को बहुत ही इज्जत भी देता था|

औरंगजेब की युद्ध नीति बहुत क्रूर थी जिसके कारण ही इतने विरोधी पैदा हो गए की औरंगजेब की मृत्यु लड़ाई में ही हो गई| औरंगजेब को बुंदेला वीर छत्रसाल ने मारा था (auranzgeb ko bundela veer chhatrasaal ne mara tha) | इसे कहा जाए तो औरंगजेब की छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ भी लड़ाई हुई थी|

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