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खुशी का पता(motivational Hindi story)

हमारे जीवन में बहुत सारी खुशियां होती ही है मगर बाहरी दिखावे में वह हमें नजर ही नहीं आती| जिसकी वजह से हम खुशी होने के बावजूद दुखी ही रहते हैं| कहीं ना कहीं हमें बार-बार motivational Hindi story पढ़ने से प्रेरणा मिलती है|

आज की कहानी भी कुछ यही समझlती है, यह कहानी सच्ची घटना है जिससे हमें अपने जीवन में बहुत सारा ज्ञान मिल सकता है|

चलिए शुरू करते हैं कहानी,

बहुत साल पहले की बात है इतने साल की जब इलेक्ट्रिक सिटी भी नहीं थी मतलब की लाइट भी नहीं थी और लोग अंधेरे में ही रहते थे|

बात है अरबस्तान(Arbstan) की जहां पर राबिया बसरी नाम के सूफी संत रहते थे| राबिया जी छोटे से गांव से थोड़े दूर एक झोपड़ी में रहते थे| लाइट नहीं थी तो लोगों को अंधेरे में यानी की रात के समय कोई काम हो तो गांव के चौराहे पर रखी हुई मसाल के उजाले में अपने काम करते थे|

एक दिन शाम को मसल के उजाले में राबिया जी कुछ खोज रहे थे| वहां से थोड़े युवान निकले| युवाओं ने देखा कि राबिया जी कुछ खोज रहे हैं, तो उनकी मदद करने के लिए युवाओं ने राबिया जी से पूछा,” आप क्या खोज रहे हैं”? आपका कुछ खो गया है क्या?” क्या हम आपकी मदद कर सकते हैं?”

सुई खो गई है

राबिया जी बोले,” बेटा मेरे कपड़े सिलने की सी खो गई है| उसी को खोज रहा हूं| आप सब मेरी मदद करेंगे तो मैं आप सब का आभारी रहूंगा|” सभी युवान सुई खोजने में लग गए|

थोड़ी देर तक सबने बहुत ही खोज की मगर सुई नहीं मिली| सभी युवाओं ने मिलकर राबिया जी से पूछा, आखिर आपकी सी कहां खो गई है वह जगह तो बताइए|”

खुशी का पता(motivational Hindi story)

राबिया जी ने गांव से दूर जो अपनी झोपड़ी है उसे तरफ हाथ दिखा कर कहा,” सुई तो मेरी झोपड़ी में अंदर खो गई है| मगर झोपड़ी में इतना अंधेरा है और यहां इतना अच्छा उजाला है इसलिए मैं यहीं पर खोज रहा हूं|”

सभी युवा पेट पड़कर हंसने लगे| उन लोगों को हंसता देख राबिया जी ने युवा नको हंसने का कारण पूछा,” आप लोग इतना क्यों हंस रहे हो”

सभी युवाओं ने हंसते-हंसते ही जवाब दिया,” आप भी कितने मूर्ख है, जहां पर सुई खो गई है वहां पर खोजने की बजाय आप यहां खोज रहे हैं| अगर आप अपनी झोपड़ी में खोजने तो मिलती | यहां पर खोजने से थोड़ी ना मिलेगी| भले ही झोपड़ी में अंधेरा है मगर आपकी सुई तो वहीं पर खो गई है तो वहीं से ही मिलेगी यहां उजाला है तो यहां थोड़ी ना मिलेगी| मसला तो क्या यहां पर अगर सूर्य का प्रकाश भी हो तो भी आपकी सुई नहीं मिलेगी|”

राबिया जी ने बहुत शांति से जवाब दिया,” मैं अकेले कहां मुर्ख हूं मूर्ख तो पूरी दुनिया है, सभी लोग ऐसा करते हैं अपने सुख को अपनी शांति को खोजते हैं ऐसी जगह जहां वह है ही नहीं और जहां खो गया है वहां खोज ही नहीं रहे हैं|”

इस कहानी से मैं इतना ही कहना चाहूंगी कि सच्चा सुख और शांति हमारे परिवार में मित्रों में आस पड़ोस में मजबूत संबंध में है मगर हम लोग सभी को खोज रहे हैं बस पैसों में प्रतिष्ठा में जो कभी नहीं मिलने वाला|

अगर सच्चा सुख चाहिए तो अपने परिवार जनों के साथ ही आपको मिल सकता है| पैसों में कभी वह सुख नहीं मिल सकता|