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Hindi News – सरकार की हेल्पलाइन नंबर 155260 For Online Fraud

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 155260 जारी की है , और इस Reporting प्लेटफॉर्म का संचालन भी शुरू किया है , राष्ट्रीय हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म , साइबर धोखाधड़ी वाले मामले में नुकसान उठाने वाले व्यक्तियों को इससे Help मिलेगी , ताकि उनकी कमाई वाली राशि बेकार ना जाए।

सुरक्षित डिजिटल पेमेंट eco – सिस्टम देने और साइबर अपराध (Cyber Crime ) के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए , केंद्र सरकार द्वारा ये कदम उठाया गया है , जिसमे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 155260 और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म को संचालन की सुविधा शुरू की है।

Hindi News – सरकार की हेल्पलाइन नंबर 155260 (Cyber Crime Helpline Number 155260)

आपको बता दें की इस नए हेल्पलाइन नंबर का उपयोग 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशो जिसमे – छत्तीसगढ़ , दिल्ली , Madhyapradesh , राजस्थान , तेलंगाना , उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शामिल है , किया जा रहा है। और अन्य राज्यों में भी इसे जल्दी ही शुरू किया जा सकता है , ताकि पूरा देश इसका फायदा ले सके।

इस नयी सुरक्षा प्रणाली के लांच के केवल २ महीने में ही हेल्पलाइन नंबर 155260 ने करीब १.85 करोड़ रूपये से भी ज्यादा के धोखाधड़ी वाले पैसे को , जालसाज़ों के हाथो में जाने से बचाया है।

How To Cyber Crime Helpline Number Work हेल्पलाइन नंबर 155260
Hindi News – सरकार की हेल्पलाइन नंबर 155260 For Online Fraud

इससे पहले इसी Helpline को ०१ अप्रैल २०२१ के दिन Soft लांच कर दिया था , इस हेल्पलाइन नो. 155260 और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI ) , सभी मुख्य बैंक , भुगतान बैंक , वॉलेट और online मर्चेंट के एक्टिव समर्थन और सहयोग से गृह मंत्रालय के तहत साइबर क्राइम (आई ४ सी ) द्वारा संचालित होगा।

हेल्पलाइन और इससे जुड़े हुए प्लेटफॉर्म का काम करना : How to Cyber Crime Helpline Number work

१. Cyber क्राइम के शिकार वाले लोग हेल्पलाइन नंबर 155260 पर कॉल करते हैं , जो राज्य की पुलिस द्वारा संचालित किया जाता है।

२.इस कॉल का जवाब देने वाले पोलिस ऑपरेटर , क्राइम वाले लेनदेन का ब्यौरा और कॉल करने वाले पीड़ित का फंडामेंटल व्यक्तिगत जानकारी लिखता है और इस जानकारी को नागरिक वित्तीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग और मैनेजमेंट सिस्टम पर एक Ticket के रूप में दर्ज करता है।

३.फिर ये टिकट संबंधित बैंक , वॉलेट , मर्चेंट तक पहुचांया जाता है।

४.इसके बाद पीड़ित को एक SMS भेज दिया जाता है , जिसमे उसकी Complain की रशीद संख्या होती है , और साथ ही दिशानिर्देश भी होते है , की इस रशीद संख्या का यूज़ २४ घंटे के अंदर क्राइम का पूरा विवरण राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग ऑनलाइन पोर्टल (https://cybercrime.gov.in/) पर जमा कर दे।

५.इसके बाद समन्धित बैंक , जो Reporting पोर्टल के Dashboard पर इस ticket को देख सकता है , वो अपने सिस्टम में इस विवरण की जांच करता है।

६. और यदि धोखाधड़ी का पैसा अभी कटा नहीं है , यानी अभी भी बैंक में ही है , तो बैंक उसे रोक देता है , यानी धोखाधड़ी करने वाला उस पैसे को नहीं निकलवा सकते।

७.और यदि ये धोखाधड़ी वाला पैसा दूसरे बैंक में चला गया है , तो वो ticket अगले बैंक तक पहुँचाया जाता है , जिस बैंक में पैसा गया है , और ये प्रक्रिया तब तक चलती रहती है , जब तक पैसा बचा ना लिया जाए।

८ इस मौजूदा समय में इस Helpline और इसके Reporting के प्रमुख सरकारी और प्राइवेट बैंक शामिल हैं , जिनमे – भारतीय स्टेट बैंक , पंजाब नेशनल बैंक , बैंक ऑफ़ बड़ौदा , आई सी आई सी आई बैंक, HDFC बैंक , एक्सिस बैंक , Yes बैंक कोटक महिंद्रा बैंक , यूनियन बैंक और बैंक ऑफ़ इंडिया भी शामिल है।

९.इसके अलावा सभी मुख्य वॉलेट और मर्चेंट भी इस रिपोर्टिंग सिस्टम और हेल्पलाइन से जुड़े हैं , जिनमे – पेटीएम , फोनपे , मोबिक्विक , फ्लिपकार्ट और अमेजॉन भी शामिल है।

Conclusion – Cyber crime Helpline number 155260 in india

इस रिपोर्टिंग सिस्टम और हेल्पलाइन की सफलता का पैमाना इसी से मापा जा सकता है , जिसमे कई बार ऐसे समय पर धोखाधड़ी वाले पैसे को हटाने के 5 अलग – २ बैंको में पैसे डालने के बाद भी उस पैसे को ठगो तक पहुंचने से रोक दिया गया है।

आप इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों और रिस्तेदारो तक पहुचाये , ताकि उनको भी सरकार के इस नए और अच्छे सिस्टम के बारे में लोगो को पता चले और , आप और आपके मित्र और रिस्तेदारों का पैसा किसी धोखेबाज के पास ना जाए।